बुधवार, 26 मार्च 2014

केजरीवाल को मोदी द्वारा पाक का एजेंट कहे जाने पर हुए हल्ले के सन्दर्भ में यह समझा जाना बहुत जरूरी है कि ये आप वाले किस प्रकार अघोषित पाक एजेंट साबित हो रहे हैं । पाकिस्तान आखिर भारत में क्या चाहता है ? पाक भारत में अस्थिरता फैलाना चाहता है । अपनी रैलियों में केजरीवाल पूछते हैं कि ये स्थिरता पर वोट मांगे जा रहे हैं तो ये स्थिरता क्या है । स्थिरता की  जरूरत ही क्या है ? इस देश को एक ईमानदार सरकार चाहिए न कि स्थिरता । वाह , जो केजरीवाल खुद तो भाग गए उनपचास दिन की  सरकार के बाद और वे यह दावा करते हैं कि इस देश को स्थिरता के बजाय ईमानदार सरकार चाहिए । सही है लेकिन केजरीवाल के मुह से अच्छी नहीं लगती । पाक भी तो यही चाहता है कि भारत में स्थिरता नहीं आनी  चाहिए क्योंकि स्थिरता से भारत मजबूत होगा ।
केजरीवाल कहते हैं कि मई अराजक हूँ । पाकिस्तान क्या चाहता है ? भारत में अराजकता ? तो भाई यह तो पाक की  ही इच्छा पूरी हुई । आखिर केजरीवाल किसके उद्देश्यों को पूरा कर रहे हैं ? पाक के न ।
पाक क्या चाहता है कि कश्मीर पर उसका अधिकार हो जाए । तो उसका यह उद्देश्य भी केजरीवाल पूरा कर रहे है । इनकी अपनी साईट पर कश्मीर को भारत का हिस्सा ही नहीं दिखाया गया । भारत का नक्शा कश्मीर रहित दिखाया गया हालांकि पोल खुलने के बाद इन्होने फ़टाफ़ट हटा लिया । प्रशांत भूषन जब तब हरकत करते ही रहते हैं ।
पाक क्या चाहता है ? कश्मीर पर जनमत संग्रह । ये भी चाहते हैं कि कश्मीर पर जनमत संग्रह हो ।
पाक क्या चाहता है ? भारत में नक्सल समस्या बरकरार रहे । ये भी नक्सलियों को सपोर्ट करते ही हैं ।
पाक क्या चाहता है कि भारत कभी भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं से न निपट सके और तंगहाल रहे । ये भी मोदी
पाक मोदी से नाखुश है मगर केजरीवाल से खुश है । वहाँ के अख़बार इन केजरीवाल की प्रशंसा में रंगे  पड़े हैं । यानि यदि ये पाक को खुश करने में लगे हैं तो फिर हमारे शत्रु को खुश करने वाला क्या कहलायेगा ।
इन्हे सबसे सवाल पूछने का शौक है पर जवाब देने का नहीं ।
क्या कमाल है । यूं पी ए  को यह हराना चाहते हैं । एन डी  ए  को आने नहीं देना चाहते । खुद सत्ता में आना नहीं चाहते । हो गयी न अराजकता । पाक की  इच्छापूर्ति  ।
हाफिज सईद  जैसे लोग इनसे और हमारे गृहमंत्री रक्षामंत्री आदि से बड़े खुश हैं क्योंकि इनकी बातें उनकी मदद गार ही साबित होती हैं । सो समझिये इनके इरादों को । 
विरोध के द्वारा और यू पी ए  को बनाये रखकर यही हाल देश का करना चाहते हैं ।
मजेदार बात यह है कि यू पी ए  सत्ता में है लेकिन इनकी लड़ाई मोदी से हो गयी है । ये सारा ध्यान देश व यूं पी ए  के भ्रष्टाचार से हटाकर मोदी और गुजरात पर ले जाना चाहते हैं और मोदी और गुजरात को बदनाम कर के पाक के नापाक उद्देश्यों को पूरा करना चाहते हैं ।
इसलिए मोदी कहें या न कहें , ये देश के शत्रुओं की  ही मदद कर रहे हैं । इनके लोग कह रहे हैं कि नक्शे में तो किन्ही अन्य कारणों से कश्मीर को हाईलाइट नहीं किया गया । लेकिन इनके भारत नक़्शे में कश्मीर है ही नहीं । और यदि कोई अन्य कारण था तो हटा क्यों लिया ।
इसलिए केजरीवाल नापाक साबित हो गए हैं जिनका नाम लेने पर अन्ना  तक को कहा पड़ा कि शुभ शुभ बोलें ।  इसलिए केजरीवाल को समझना बहुत जरूरी है । वे पाक के ही मदद गार साबित हुए है ।

रविवार, 23 मार्च 2014

कोई बुराई नहीं है हर हर मोदी में । 
दिग्विजय सिंह के बयान के बाद जिस प्रकार से शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी हर हर मोदी के विरोध में उतर आये हैं वह बहुत ही हास्यास्पद सा मामला है । ये वही शंकराचार्य हैं जिनसे जब एक पत्रकार ने यह पूछ लिया था कि यदि नरेंद्र मोदी प्रधानमन्त्री बनते हैं तो ……… इतना कहते ही इन्होने उस पत्रकार महोदय के मुह पर एक थप्पड़ मार दिया था । यही वे शंकरचार्य हैं जिन्होंने सोनिया गांधी के अमेरिका में इलाज के दौरान भारत में उनके स्वास्थ्य  लाभ के लिए यज्ञ करवाया था । इसमें कोई बुराई नहीं है लेकिन जिस पद पर वे बैठे हैं उसमे उनके हर कार्य पर नजर राखी ही जायेगी । यदि शंकराचार्य  दिग्विजय सिंह जी की  टिपण्णी से पहले यह सब कह देते तब तो बात समझ आती लेकिन अपने राजनैतिक शिष्य की  आपत्ति के बाद शंकराचार्य को होश आना कि यह तो गलत है , विषय को ही संदिग्ध बना देता है । 
खैर , आइये , बात करें , हर हर मोदी की ।
जो बेकार की  बातें की  जा रही हैं उनका निस्तारण किया जाना जरूरी है । 
क्या डॉक्टर भगवान् होता है ? यदि नहीं तो क्या डॉक्टर को भगवान् कहना भगवान् का अपमान नहीं है ? यदि हाँ तो क्या खराब डॉक्टर को हम भगवान् मानेंगे या नहीं ? इस झगड़े में पड़ना चाहेंगे आप ? नहीं न ? तो फिर हर हर मोदी में क्यों ?
क्या जनता जनार्दन होती है ? जनार्दन यानि विष्णु । जनता को भी नेता की  निगाह में भगवान् का दर्जा दिया गया है । तो क्या यह भगवान् विष्णु का अपमान है ? यदि हाँ तो फिर अब तक आपत्ति क्यों नहीं ? और यदि नहीं तो फिर भावना क्या है ? और यदि उस विष्णु रूपा जनता ने हर हर मोदी कह दिया तो फिर हर हर मोदी में बवाल क्यों ?
शंकराचार्य स्वरूपानंद जी तो पार्टी विशेष के प्रति लगाव रखने के लिए जाने जाते हैं लेकिन आदि शंकराचार्य ने ब्रह्म सूत्र की  रचना की  । स्वरूपानंद जी ने भी ब्रह्मसूत्र अवश्य ही पढ़ा होगा । उसका पहला सूत्र है - तत् त्वम् असि । यानि वह तुम हो । यानि वह ब्रह्म तुम हो । यानि पहले ही सूत्र में गुरु शिष्य को समझाता है - तुम ब्रह्म हो । तो क्या यह उस ब्रह्म का अपमान हो गया । शंकराचार्य जी ने यह सीखा भी होगा और सिखाया भी होगा । तो क्या यह ब्रह्म का अपमान हो गया ।
फिर शिष्य से कहा जाता है कि वह बोले और आत्मसात करे - अहम् ब्रह्मास्मि । यानि मैं ब्रह्म हूँ । तो क्या यह ब्रह्म का अपमान हो गया ? शंकराचार्य विद्वान् हैं और यह भी उन्होंने पढ़ा होगा अवश्य ही । तो फिर हर हर मोदी में बवाल क्यों ?
शास्त्रों में कहा गया है कि - शुनि चैव श्वपाके च पंडिता समदर्शिनः । यानि पंडित लोग कुत्ते में और चांडाल में भी भेद नहीं करते । वे कुत्ते में और चांडाल में भी उस ही ब्रह्म को देखते हैं  जिसे वे स्वयं में ढूंढते हैं । तो फिर यहाँ पर किसका अपमान हो गया ? क्या कुत्ते और चांडाल में उसी ब्रह्म को देखना ब्रह्म का अपमान हो गया ? यदि नहीं तो फिर हर हर मोदी में बवाल क्यों ?
श्रीमद्भागवत में लिखा है कि भगवान् कहते हैं कि जो भक्त निरपेक्ष भाव से जीवन यापन करता है मैं उसके पैरों की धूल  से अपने को पवित्र कर लेता हूँ । क्या भगवान् अपना अपमान कर रहे हैं ? इंडिया इज इंदिरा और इंदिरा इज इंडिया कहने पर तो कुछ नहीं हुआ था ? वाजपेयी जी ने इंदिरा गांधी जी को दुर्गा कहा था तब तो दुर्गा जी का कोई अपमान नहीं हुआ था ? पांच दिन बाद नवरात्रों में कन्या पूजन उसी दुर्गा भावना से होने वाला  है तब तो देवी का कोई अपमान नहीं होगा तो फिर यह व्यर्थ की  बकवास क्यों ?
यह बकवास इसलिए क्योंकि जिस प्रकार पापी अपने पाप से मरता है वैसे ही कांग्रेस अपने आप ही ख़त्म होगी । इस प्रकरण से भी नरेंद्र मोदी जी को ही फायदा होगा क्योंकि प्रकृति ऐसा ही चाहती है ।
इसलिए जोर से बोलिये -
हर हर मोदी , घर घर मोदी ।

शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2014

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सोमवार, 10 फ़रवरी 2014

मेरा एक नायक सा था । ख़त्म सा हो गया वह । कभी उसने अलख सी जगाई थी । सत्ता के खिलाफ । लेकिन फिर मैंने सत्ता के मद से पराजित सा होते देखा उसे । लेकिन वह पराजित हुआ नहीं । लेकिन उसके सुर जरूर धीमे पड़े । अब वह यदा कदा  दिखाई देता है । टी वी पर । टी वी पर दिखना एक बीमारी है । उसे भी लगी है । हालांकि वह संकल्प लिए हुए है कि जिन्होंने उसके संकल्प को कुचलने की  कोशिश की  वह उन्हें कुचल देगा । कहना मुश्किल है क्या होगा । उसका संन्यास भी उसे जीवन में प्रवेश से रोकता नहीं है । लेकिन एक बात तय है । यदि चाणक्य का जीवन दर्शन उसके जैसा होता तो चाणक्य शायद ही कभी नन्द को रोक पाते । दिक्कत यह है कि वह मननात् मन्त्रः की  गोपनीयता को नहीं समझ पाता  । खैर , उसने अपने विरोधियों के राजनैतिक कैरियर की  तेरहवीं की  सौगंध खाई है । देखते हैं , क्या होता है ।

गुरुवार, 6 फ़रवरी 2014

धर्म एव हतो  हन्ति , धर्मो रक्षति रक्षितः ।
तस्मात्धर्मो न हन्तव्यो , मा  नो धर्मो हतोवधीत् ॥ मनुस्मृति ८,१५
अर्थात्
मारा हुआ धर्म मारने वाले को ही मार देता है और रक्षा किया हुआ धर्म अपने रक्षक की  ही रक्षा करता है । इसलिए धर्म का हनन नहीं करना चाहिए , ऐसा न हो कि हनन किया हुआ धर्म हमें नष्ट कर दे ।
यानि यदि हम धर्म की  रक्षा नहीं करते हैं यानि धर्म को मार देते हैं तो यही मरा हुआ धर्म हमें मार देता है और यदि हम धर्म की  रक्षा करते हैं तो यही धर्म हमें बचाता है यानि धर्म हमारी रक्षा करने के लिए ही होता है । इसलिए धर्म को बचाएं । कहीं ऐसा न हो कि मारा गया धर्म हमें ही न मार दे ।


                                 डॉ द्विजेन्द्र शर्मा , हरिपुर कलां , देहरादून

शनिवार, 1 फ़रवरी 2014

उद्योगिनं  हि  पुरुषसिंघमुपैति लक्ष्मी
 दैवं हि  दैवमिति कापुरुषा वदन्ति ।
दैवं निहत्य कुरु पौरुषमात्मशक्त्या
यत्ने  कृते यदि न सिध्यति कोत्र दोषः ॥
अर्थ -
परिश्रमी व्यक्ति को ही संपत्ति मिलती है
भाग्य ही सब कुछ है यह कायर लोग बोलते हैं ।
भाग्य को मारकर अपनी शक्ति से पुरुषार्थ करो ,
यत्न करने पर यदि सिद्ध नहीं होता तो इसमें दोष भी क्या ?
नमो नमः