जन आंदोलन में जो भीड़ केजरीवाल साहब को सुहाती थी वही भीड़ जब माँगने आयी
तो समझ में आया कि भीड़ क्या होती है ? भैया ! आपको जिसने वोट दिया वह
मांगने भी आएगा । कब तक छत पर चढ़ेंगे ? कल लोग सीढ़ी लेकर आने लगेंगे तब
क्या करेंगे ? हेलीकाप्टर पर चढ़ेंगे ?
शनिवार, 11 जनवरी 2014
दिल्ली में जनता दरबार लगा । और समाप्त हो गया है । क्या आप ऐसा ही पी एम भी देखना चाहते हैं ? क्या आप चाहते हैं कि देश में ऐसा ही अफरा तफरी का माहौल हो । केजरीवाल साहब को इतनी जल्दी सब कुछ करने और हथिया लेने की पड़ी है कि वे सोच रहे हैं कि सब को सबकुछ दे दें । लेकिन यह सम्भव नहीं है । उन्होंने वायदे तो कर दिए लेकिन वे वायदों को जल्दी पूरा करने की जल्दी दिखा रहे हैं । सीधे सीधे उन्हें तमाम कामों को बिना किसी भावना के वशीभूत हुए करना चाहिए । अब वे भूल जाएँ कि उन्होंने क्या वादे किये वे सिर्फ काम करें । वे जो काम करेंगे जनता के लिए ही करेंगे । धीरे धीरे करें । केजरीवाल साहब ! यदि आपने दो चार काम भी आसानी से कर दिए और तब भले ही आपकी सरकार गिर जाये लेकिन तब जनता समझ जायेगी कि आप को समय कम मिला । समय ज्यादा मिलता तो आप कुछ और भी अच्छा करते । लेकिन करें तो क्या करें । आप को तो लोकसभा भी जीतना है अपनी टीम के सदस्यों को आपने लोकसभा जीतने के लिए भी लगा रखा है । उन सबको वापस बुलाइए । और सबकी मदद से इस काम को करें । भूल जाएँ लोकसभा को । अगर आपने दिल्ली को संवार दिया तो अन्य राज्यों में आपको कोई नहीं हरा पायेगा । जगह अपने आप बनती जायेगी । अभी आप को अंदाजा भी नहीं होगा कि आपकी पार्टी में कितने लुच्चे लफंगे सदस्यता ले रहे हैं । ये सब आपकी पार्टी को ही बदनाम कर रहे हैं । आप सब कुछ खुद ही कर लेना चाहते हैं लेकिन यह उचित भी नहीं है । एक सिस्टम होता है । आप उस पर चलें । यह जो सोच है कि मोदी को रोको जिसके लिए आपने लोकसभा चुनाव लड़ना तय किया है इससे आप की छवि गिर रही है आप लोग कब तक माफ़ी मांगते रहेंगे। आपकी माफ़ी से लोंगों ने कहना शुरू कर दिया है कि एक माफ़ी मंत्रालय आपको सबसे पहले खोलना चाहिए । लेकिन करें तो क्या करें । आप तो ऐसे हो गए हैं जैसे एक स्कूल का प्रिंसिपल घंटी भी खुद बजाये , क्लर्क का काम भी खुद करे । पानी भी खुद पिलाये । प्रिंसिपलशिप भी करे । अरे भैया ! माना कि समाज को आपने चोरों से मुक्त करने का ठेका लिया है पर स्वयं को तो संभालिये । एक चोर से तो आपने हाथ मिला लिया है और अब घबराये जा रहे हैं । भूल जाइये सब कुछ । सारे वादे । यह सस्ता तरीका । धीरे धीरे काम करिये । ठोस काम करिये । ताकि लोग आपको सस्ते काम के लिए नहीं बल्कि ठोस कार्यों के लिए याद करें । समझे ।
बुधवार, 8 जनवरी 2014
मोदी का खौफ
जबसे जिन्दा हूँ और होशोहवाश में हूँ । मैंने इतना खौफ किसी का नहीं देखा जितना नरेंद्र मोदी का देखा है विपक्षियों में । कांग्रेस तो अस्तित्व के संकट से जूझ रही है और बौखलाई हुई है । उसके नेता जानते हैं कि उसके पप्पू सरीखे नेता ने उनको पूरी तरह से निराश कर दिया है । अब प्रियंका गांधी को ढोल नगाड़े के साथ वे कंधे पर बैठाएंगे । इधर मोदी को जिस तरह से गुजरात दंगों में लपेटकर घेरा जा रहा है और सिर्फ दो हज़ार दो ही याद करवाया जा रहा है कि कहीं दो हज़ार दो मत भूल जाना । उससे लगता है कि मोदी विरोधियों के पास इसके सिवाय कुछ है भी नहीं । तो क्या यह अन्य दलों के लिए ही अस्तित्व की लड़ाई हो गयी है ?
बीजेपी में भी कुछ लोग घबराये हैं । सुषमा जी का और अब आडवाणी जी का चेहरा दिखाई नहीं देता है और वे दोनों अब राजनैतिक परिदृश्य से गायब से हो गए हैं । उनकी मुस्कान गायब है । चेहरा उतरा हुआ है । वे कदाचित इन्तजार कर रहे हों और प्रार्थना कर रहे होंगे कि किसी तरह से इस मोदी नाम के कांटे को निकाला जाए । उनकी दिक्कत यह है कि वे मोदी की सीधे बुराई नहीं कर सकते । वरना वे भी मोदी को दो हज़ार दो पर घेरने में पीछे नहीं रहते । लेकिन अपनी पार्टी की बुराई कैसे करें । सिर्फ पराजय की दुआ कर सकते हैं । खैर ,
इधर एन डी ए के एक सहयोगी राज ठाकरे अलग परेशान हैं । वे शायद महाराष्ट्र में मोदी की रैली में बाल ठाकरे की रैलियों जैसी भीड़ देख कर घबराये है । उनका मराठी मानुष मन बेचैन है । इसलिए मोदी को सलाह देते हैं कि उन्हें अब गुजरात का मुख्यमंत्री पद छोड़ देना चाहिए । और कहते हैं कि मोदी अब पी एम् उम्मीदवार हैं इसलिए सिर्फ गुजरातियों की बात न करें । प्रशंसा भी करते हैं भारी मन से । अब उत्तर भारतीयों को गाली देने वाला इंसान सलाह दे रहा है ? जो अब तक मराठी मानुष मन से बाहर न निकल पाये वे देश की सीख दे रहे हैं ।
जिस तरह से दो हज़ार दो को रटाया जा रहा है और गुजरात के विकास को दर किनार किया जा रहा है वह हैरानी पैदा करता है । अब एक नयी पार्टी आयी है जिसके बारे में सोचकर कांग्रेस खुश है क्योंकि वहाँ जहां दिल्ली में पहले आप ने कांग्रेस को डुबाया वहाँ उसने समर्थन देकर आप की नैतिकता को डुबा दिया है । और अब उसी के भरोसे वह अपना बेडा पार देख रही है । इधर आप वाले कहते हैं कि वे मोदी कल्चर में विश्वास नहीं करते । उनके गोपाल राय कहते है - मोदी कल्चर मतलब मारकाट का कल्चर , दो हज़ार दो की संस्कृति , यानि दंगे की संस्कृति । हैरानी होती है आप पर , जो पार्टी नयी सोच का हवाला देकर राजनीति में आयी हो वह वही सडे गले विचार रखे जो अब तक और पार्टियां रखती आयी हैं तो हैरत होना स्वाभाविक है । गुजरात दंगा गोधरा की क्रिया की प्रतिक्रिया था यह तो सब मानते हैं । तो क्या गोपालराय यह कहना चाहते हैं कि गोधरा फिर दोहराया जाएगा और क्रिया पर प्रतिक्रिया फिर होगी । तो क्या वे मुसलामानों पर यह आरोप लगाना चाहते हैं कि वे फिर दंगे करेंगे ? गुजरात में दो हज़ार दो के बाद क्रिया नहीं हुयी तो प्रतिक्रिया भी नहीं हुयी । ११ साल से एक राज्य शांत और प्रगति पथ पर है । गोपाल राय क्या कहेंगे जब उन्हें पूछा जाए कि वो उन्नीस सौ चौरासी के कत्लेआम के आरोपियों के साथ खड़े हैं और सरकार बनाये हुए हैं । आज मोदी सिर्फ विकास की बात करते हैं । इससे इतर कुछ नहीं । मनमोहन जैसे पी एम् ने मोदी को विनाशक कह दिया , क्या पी एम् को यह शोभा देता है ? नहीं । लेकिन खौफ ही ऐसा है मोदी का कि हर तरफ हाहाकार मचा है । बटला हाउस एनकाउंटर को फर्जी कहने वाली आप ने इस सम्बन्ध में अपने विचार कभी नहीं रखे । उनके प्रशांत भूषन कश्मीर पर अपना विवादस्पद बयान फिर से दोहराते हैं लेकिन पार्टी उनके बयान से किनारा कर लेती है । क्या यह धोखा नहीं है । क्या पार्टी को उन्हें डपटना या नोटिस नहीं देना चाहिये था । आप कहेंगे कि भाई , और पार्टियां कौन सा ऐसा करती हैं ? लेकिन और पार्टियां ऐसे वैसे बयान भी नहीं जारी करती । प्रशांत भूषन ने अभी तक इस बयान पर कोई न तो शोक प्रकट किया न माफ़ी मांगी । और न तो यह आश्वासन दिया कि दोबारा वे विचार कर ऐसे बयान देंगे ।आप तो शिंदे वाली पार्टी के तौर तरीकों पर अपनाने में लगी है । आपने उर्दू को दिल्ली में द्वितीय राजभाषा का दर्जा देने की बात कही । क्या है यह ? सिर्फ वोटों के लिए ?आप तो अलग मूल्यों की बात करते हैं न । तो फिर यह मत कहिये कि औरों ने क्या किया है ? मैं तो मोदी समर्थक हूँ और चाहता हूँ कि मोदी पी एम् बनें । लेकिन जहां जहां भ्रष्ट राज्य सरकारें हैं वहाँ स्वच्छ आप की सरकार आये । लेकिन आप का मोदी विरोध मुझे अरविन्द विरोधी बना रहा है ।
मोदी खौफ के नहीं विकास के प्रतीक हैं और सभी को यह समझना होगा कि मोदी दबाव में अच्छी बैटिंग करते हैं । इसलिए करिये मोदी विरोध ।
डॉ द्विजेन्द्र , हरिपुर कलां , देहरादून
जबसे जिन्दा हूँ और होशोहवाश में हूँ । मैंने इतना खौफ किसी का नहीं देखा जितना नरेंद्र मोदी का देखा है विपक्षियों में । कांग्रेस तो अस्तित्व के संकट से जूझ रही है और बौखलाई हुई है । उसके नेता जानते हैं कि उसके पप्पू सरीखे नेता ने उनको पूरी तरह से निराश कर दिया है । अब प्रियंका गांधी को ढोल नगाड़े के साथ वे कंधे पर बैठाएंगे । इधर मोदी को जिस तरह से गुजरात दंगों में लपेटकर घेरा जा रहा है और सिर्फ दो हज़ार दो ही याद करवाया जा रहा है कि कहीं दो हज़ार दो मत भूल जाना । उससे लगता है कि मोदी विरोधियों के पास इसके सिवाय कुछ है भी नहीं । तो क्या यह अन्य दलों के लिए ही अस्तित्व की लड़ाई हो गयी है ?
बीजेपी में भी कुछ लोग घबराये हैं । सुषमा जी का और अब आडवाणी जी का चेहरा दिखाई नहीं देता है और वे दोनों अब राजनैतिक परिदृश्य से गायब से हो गए हैं । उनकी मुस्कान गायब है । चेहरा उतरा हुआ है । वे कदाचित इन्तजार कर रहे हों और प्रार्थना कर रहे होंगे कि किसी तरह से इस मोदी नाम के कांटे को निकाला जाए । उनकी दिक्कत यह है कि वे मोदी की सीधे बुराई नहीं कर सकते । वरना वे भी मोदी को दो हज़ार दो पर घेरने में पीछे नहीं रहते । लेकिन अपनी पार्टी की बुराई कैसे करें । सिर्फ पराजय की दुआ कर सकते हैं । खैर ,
इधर एन डी ए के एक सहयोगी राज ठाकरे अलग परेशान हैं । वे शायद महाराष्ट्र में मोदी की रैली में बाल ठाकरे की रैलियों जैसी भीड़ देख कर घबराये है । उनका मराठी मानुष मन बेचैन है । इसलिए मोदी को सलाह देते हैं कि उन्हें अब गुजरात का मुख्यमंत्री पद छोड़ देना चाहिए । और कहते हैं कि मोदी अब पी एम् उम्मीदवार हैं इसलिए सिर्फ गुजरातियों की बात न करें । प्रशंसा भी करते हैं भारी मन से । अब उत्तर भारतीयों को गाली देने वाला इंसान सलाह दे रहा है ? जो अब तक मराठी मानुष मन से बाहर न निकल पाये वे देश की सीख दे रहे हैं ।
जिस तरह से दो हज़ार दो को रटाया जा रहा है और गुजरात के विकास को दर किनार किया जा रहा है वह हैरानी पैदा करता है । अब एक नयी पार्टी आयी है जिसके बारे में सोचकर कांग्रेस खुश है क्योंकि वहाँ जहां दिल्ली में पहले आप ने कांग्रेस को डुबाया वहाँ उसने समर्थन देकर आप की नैतिकता को डुबा दिया है । और अब उसी के भरोसे वह अपना बेडा पार देख रही है । इधर आप वाले कहते हैं कि वे मोदी कल्चर में विश्वास नहीं करते । उनके गोपाल राय कहते है - मोदी कल्चर मतलब मारकाट का कल्चर , दो हज़ार दो की संस्कृति , यानि दंगे की संस्कृति । हैरानी होती है आप पर , जो पार्टी नयी सोच का हवाला देकर राजनीति में आयी हो वह वही सडे गले विचार रखे जो अब तक और पार्टियां रखती आयी हैं तो हैरत होना स्वाभाविक है । गुजरात दंगा गोधरा की क्रिया की प्रतिक्रिया था यह तो सब मानते हैं । तो क्या गोपालराय यह कहना चाहते हैं कि गोधरा फिर दोहराया जाएगा और क्रिया पर प्रतिक्रिया फिर होगी । तो क्या वे मुसलामानों पर यह आरोप लगाना चाहते हैं कि वे फिर दंगे करेंगे ? गुजरात में दो हज़ार दो के बाद क्रिया नहीं हुयी तो प्रतिक्रिया भी नहीं हुयी । ११ साल से एक राज्य शांत और प्रगति पथ पर है । गोपाल राय क्या कहेंगे जब उन्हें पूछा जाए कि वो उन्नीस सौ चौरासी के कत्लेआम के आरोपियों के साथ खड़े हैं और सरकार बनाये हुए हैं । आज मोदी सिर्फ विकास की बात करते हैं । इससे इतर कुछ नहीं । मनमोहन जैसे पी एम् ने मोदी को विनाशक कह दिया , क्या पी एम् को यह शोभा देता है ? नहीं । लेकिन खौफ ही ऐसा है मोदी का कि हर तरफ हाहाकार मचा है । बटला हाउस एनकाउंटर को फर्जी कहने वाली आप ने इस सम्बन्ध में अपने विचार कभी नहीं रखे । उनके प्रशांत भूषन कश्मीर पर अपना विवादस्पद बयान फिर से दोहराते हैं लेकिन पार्टी उनके बयान से किनारा कर लेती है । क्या यह धोखा नहीं है । क्या पार्टी को उन्हें डपटना या नोटिस नहीं देना चाहिये था । आप कहेंगे कि भाई , और पार्टियां कौन सा ऐसा करती हैं ? लेकिन और पार्टियां ऐसे वैसे बयान भी नहीं जारी करती । प्रशांत भूषन ने अभी तक इस बयान पर कोई न तो शोक प्रकट किया न माफ़ी मांगी । और न तो यह आश्वासन दिया कि दोबारा वे विचार कर ऐसे बयान देंगे ।आप तो शिंदे वाली पार्टी के तौर तरीकों पर अपनाने में लगी है । आपने उर्दू को दिल्ली में द्वितीय राजभाषा का दर्जा देने की बात कही । क्या है यह ? सिर्फ वोटों के लिए ?आप तो अलग मूल्यों की बात करते हैं न । तो फिर यह मत कहिये कि औरों ने क्या किया है ? मैं तो मोदी समर्थक हूँ और चाहता हूँ कि मोदी पी एम् बनें । लेकिन जहां जहां भ्रष्ट राज्य सरकारें हैं वहाँ स्वच्छ आप की सरकार आये । लेकिन आप का मोदी विरोध मुझे अरविन्द विरोधी बना रहा है ।
मोदी खौफ के नहीं विकास के प्रतीक हैं और सभी को यह समझना होगा कि मोदी दबाव में अच्छी बैटिंग करते हैं । इसलिए करिये मोदी विरोध ।
डॉ द्विजेन्द्र , हरिपुर कलां , देहरादून
सोमवार, 6 जनवरी 2014
अतिआत्मविश्वासी कुमार और पोंगा
सुना है कि अमेठी से समाजवादी पार्टी से एक किन्नर चुनाव लड़ने की तैयारी में है । हक़ बनता है । ठीक है । आप से कुमार विश्वास चुनाव लड़ रहे हैं । कांग्रेस के तो शहजादे हैं ही । बीजेपी का अभी तक पता नहीं ।फेसबुक पर एक चुटकुला पढ़ा - उद्धृत कर रहा हूँ - एक राजा था । राजा बहुत ही क्रूर था । अजीब अजीब सजाएं देता था । सजाओं के नाम भी अजीब अजीब होते थे । एक बार दो चोर पकडे गए । दोनों को राजा के पास लाया गया । राजा ने पूछा - तुम्हें सजा तो मिलेगी ही । बताओ , क्या सजा चाहिए ? मौत चाहिए या पोंगा ? पहला चोर सोच में पड़ गया । सोचने लगा - मौत से अच्छा तो पोंगा ही है । उसने पोंगा मांग लिया । राजा ने अपने एक सैनिक को बुलाया - कहा - छह लोहे की गरम छड़ें लाओ और इसके पेट में भौंक दो । अब दूसरे चोर ने सोचा यह पोंगा तो बहुत ही खतरनाक है । जब उससे सजा के बारे में पूछा गया तो वह बोला - मुझे तो मौत ही दे दो । राजा ने दूसरे सैनिक को बुलाया - कहा - छह लोहे की गरम छड़ें लाओ और इसके पेट में भौंक दो और तब तक भौंक कर रखो जब तक इसे मौत न आ जाए । अब अमेठी वालों से पूछना होगा कि उन्हें मौत चाहिए या पोंगा ।
खैर , अब आगे बढ़ते हैं । कुमार विश्वास लड़ रो रहे हैं लेकिन घबरा भी रहे हैं क्योंकि वे केजरीवाल नहीं हैं । वे कहते हैं । नरेंद्र मोदी में हिम्मत है तो वे अमेठी से लड़कर दिखाएं । ऐसे में वे एक तरफ तो ये साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि वे बहुत ही हिम्मती हैं क्योंकि वे राहुल के सामने चुनाव लड़ रहे हैं और दूसरी ओर बता रहे हैं कि नरेंद्र मोदी अगर हिम्मती होंगे तो अमेठी से चुनाव लड़ेंगे । उधर वे राहुल को भी महिमामंडित करने की कोशिश कर रहे हैं कि राहुल के खिलाफ लड़ना बहुत हिम्मत की बात है । लेकिन कुमार विश्वास स्वयं क्यों नहीं मोदी के खिलाफ लड़ लेते । तिकोनी लड़ाई की मलाई खाना चाहते हैं कुमार , वे अति आत्मविश्वास के शिकार हैं और बीजेपी जिस कारण से अमेठी में चुनाव हारती रही है उन वोट्स को कुमार ले जायेंगे । और बीजेपी का ही रास्ता प्रशस्त करेंगे क्योंकि जनता कभी भी इस करोड़पती आम आदमी को स्वीकार नहीं करेगी । बड़बोलापन खूबी नहीं कमजोरी होता है कुमार महोदय । आपका आगमन बीजेपी का रास्ता प्रशस्त करेगा पूरे उत्तर प्रदेश में । कांग्रेस से हाथ मिला कर दिल्ली में आपने जो खेल खेल है उससे हर आपको गाली महसूस हुई है । अरविन्द कभी अर्जुन थे अन्ना के , अन्ना ने अंगूठा मांग लिया था तो अरविन्द एकलव्य बन गए और चुनाव के बाद दिल्ली का राजा बना कर कांग्रेस ने उन्हें कर्ण बना दिया । उत्तर प्रदेश में अब कांग्रेस रुपी दुर्योधन का कर्ज़ उतारने का समय आया है । लड़िये चुनाव । जो भीड़ आप तक आ रही है वह आपसे दूर छिटकने में देर नहीं लगाएगी । दिल्ली संभालिये । फिर देश की सोचिये ।
डॉ द्विजेन्द्र , हरिपुर कलां , देहरादून
सुना है कि अमेठी से समाजवादी पार्टी से एक किन्नर चुनाव लड़ने की तैयारी में है । हक़ बनता है । ठीक है । आप से कुमार विश्वास चुनाव लड़ रहे हैं । कांग्रेस के तो शहजादे हैं ही । बीजेपी का अभी तक पता नहीं ।फेसबुक पर एक चुटकुला पढ़ा - उद्धृत कर रहा हूँ - एक राजा था । राजा बहुत ही क्रूर था । अजीब अजीब सजाएं देता था । सजाओं के नाम भी अजीब अजीब होते थे । एक बार दो चोर पकडे गए । दोनों को राजा के पास लाया गया । राजा ने पूछा - तुम्हें सजा तो मिलेगी ही । बताओ , क्या सजा चाहिए ? मौत चाहिए या पोंगा ? पहला चोर सोच में पड़ गया । सोचने लगा - मौत से अच्छा तो पोंगा ही है । उसने पोंगा मांग लिया । राजा ने अपने एक सैनिक को बुलाया - कहा - छह लोहे की गरम छड़ें लाओ और इसके पेट में भौंक दो । अब दूसरे चोर ने सोचा यह पोंगा तो बहुत ही खतरनाक है । जब उससे सजा के बारे में पूछा गया तो वह बोला - मुझे तो मौत ही दे दो । राजा ने दूसरे सैनिक को बुलाया - कहा - छह लोहे की गरम छड़ें लाओ और इसके पेट में भौंक दो और तब तक भौंक कर रखो जब तक इसे मौत न आ जाए । अब अमेठी वालों से पूछना होगा कि उन्हें मौत चाहिए या पोंगा ।
खैर , अब आगे बढ़ते हैं । कुमार विश्वास लड़ रो रहे हैं लेकिन घबरा भी रहे हैं क्योंकि वे केजरीवाल नहीं हैं । वे कहते हैं । नरेंद्र मोदी में हिम्मत है तो वे अमेठी से लड़कर दिखाएं । ऐसे में वे एक तरफ तो ये साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि वे बहुत ही हिम्मती हैं क्योंकि वे राहुल के सामने चुनाव लड़ रहे हैं और दूसरी ओर बता रहे हैं कि नरेंद्र मोदी अगर हिम्मती होंगे तो अमेठी से चुनाव लड़ेंगे । उधर वे राहुल को भी महिमामंडित करने की कोशिश कर रहे हैं कि राहुल के खिलाफ लड़ना बहुत हिम्मत की बात है । लेकिन कुमार विश्वास स्वयं क्यों नहीं मोदी के खिलाफ लड़ लेते । तिकोनी लड़ाई की मलाई खाना चाहते हैं कुमार , वे अति आत्मविश्वास के शिकार हैं और बीजेपी जिस कारण से अमेठी में चुनाव हारती रही है उन वोट्स को कुमार ले जायेंगे । और बीजेपी का ही रास्ता प्रशस्त करेंगे क्योंकि जनता कभी भी इस करोड़पती आम आदमी को स्वीकार नहीं करेगी । बड़बोलापन खूबी नहीं कमजोरी होता है कुमार महोदय । आपका आगमन बीजेपी का रास्ता प्रशस्त करेगा पूरे उत्तर प्रदेश में । कांग्रेस से हाथ मिला कर दिल्ली में आपने जो खेल खेल है उससे हर आपको गाली महसूस हुई है । अरविन्द कभी अर्जुन थे अन्ना के , अन्ना ने अंगूठा मांग लिया था तो अरविन्द एकलव्य बन गए और चुनाव के बाद दिल्ली का राजा बना कर कांग्रेस ने उन्हें कर्ण बना दिया । उत्तर प्रदेश में अब कांग्रेस रुपी दुर्योधन का कर्ज़ उतारने का समय आया है । लड़िये चुनाव । जो भीड़ आप तक आ रही है वह आपसे दूर छिटकने में देर नहीं लगाएगी । दिल्ली संभालिये । फिर देश की सोचिये ।
डॉ द्विजेन्द्र , हरिपुर कलां , देहरादून
शनिवार, 4 जनवरी 2014
मुझे लगता है कि एक सही राह का चुनाव करके केजरीवाल की पार्टी अब गलत राह पर चल पड़ी है। ऐसा इसलिए लगता है कि जब द्रौपदी का चीर हरण हुआ था तब भीष्म चुपचाप बैठे थे और शर शय्या पर जब भीष्म थे तब द्रौपदी ने उनसे पूछा था कि तात ! जब मेरा चीरहरण हुआ तो आप चुप क्यों हो गए थे ? भीष्म बोले - मैंने कौरवों का नमक खाया था दुर्योधन का नमक खाया था इसलिए मैं कुछ नहीं कर सका । मेरा आत्माभिमान मर गया था क्योंकि नमक आत्माभिमान को मार देता है । कांग्रेस से समर्थन लेकर आप की कहीं यही हालत न हो जाए । एक सवाल है । क्या आप लोकसभा में यदि कुछ सीट्स जीतती है तो कांग्रेस की सरकार के लिए मदद नहीं करेगी ? आखिर दिल्ली के इस एहसान को वह उतारेगी कैसे ? कांग्रेस का समर्थन लेकर वह करजदार हो गयी है । शेष गाडी बंगला ले लें कोई बात नहीं पर बातें वह करें जो सम्भव हों । अब बता दूं । जल्दी ही इन सबके पूरी तनख्वाह लेने की खबर आएगी भत्ते भी । कोई बात नहीं । लेकिन ऐसे अनाउंसमेंट करने की जरूरत ही क्या थी ? केजरीवाल जी ! ईश्वर आपकी नैतिकता की रक्षा करे । मनोहर परिकर और माणिक लाल जैसे मुख्यमंत्री भी हैं देश में , जिन्होंने कभी अपनी सादगी का हल्ला नहीं मचाया । थोडा उनकी और भी देखें ।
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